Wednesday, December 16, 2009

कवि विजेन्‍द्र का आभार

कल ही 'बदळती सरगम' (राजस्‍थानी कहानी संग्रह-नंद भारद्वाज) पूरी की। नया ज्ञानोदय और कथादेश के अंकों की पठनीय सामग्री को पढ़ने के क्रम से भी मुक्‍त हुआ।
'बदळती सरगम' निश्चित रूप से नंद भारद्वाज की बेहतरीन कहानियों का संग्रह है। बात को संक्षिप्‍त में न समेटा जाए इसलिए एक पूरी पोस्‍ट उस पर लिखी जानी चाहिए।

इसी बीच मासिक हंस तथा बयान का दिसम्‍बर-2009 अंक भी आ गया।

एक और उल्‍लेखनीय बात रही कि लोक चेतना की साहित्यिक पत्रिका 'कृति ओर' का 54वां अंक अक्‍टूबर-दिसम्‍बर-2009 ख्‍यातनाम कवि विजेन्‍द्र की ओर इस दौरान प्राप्‍त होता है।

विजेन्‍द्र के प्रधान संपादकत्‍व वाली यह पत्रिका इन दिनों डॉ. रमाकांत शर्मा, जोधपुर के संपादकत्‍व में निकल रही है।
इस अंक में डॉ. जीवन सिंह (ईमानदारी और आलोचना की प्रामाणिकता) व दूधनाथ सिंह (हिंसक लालित्‍य का कवि चार्ल्‍स बॉदलेयर) आलेख उल्‍लेखनीय हैं। कुमार वीरेंद्र, रामकुमार आत्रेय, बलराम कांवट, मीठेश निर्मोही, सुरेश सेन निशांत, अशोक तिवारी की कविताएं सराहनीय हैं। डॉ. शिवकुमार मिश्र से बातचीत (डॉ. हरियशराय) भी पत्रिका की महत्‍ता बढ़ाती है।

पत्रिका : कृति ओर
आवृत्ति : त्रैमासिक
प्रधान संपादक : विजेन्‍द्र
संपादक : डॉ. रमाकांत शर्मा
संकेत, ब्रह्मपुरी-प्रतापमंडल,
जोधपुर, 9414410367
शुल्‍क : एक प्रति 20 रूपये, वार्षिक 70 रूपये, आजीवन 1000 रूपये
पृष्‍ : 80

श्री विजेन्‍द्र और डॉ. रमाकांत शर्मा का आभार।

4 comments:

  1. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।



    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

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  2. अच्‍छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्‍दी चिट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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