Wednesday, November 25, 2009

कविता के माध्‍यम से कवि का संबोधन

राजस्थान की हिन्दी पत्रकारिता काफी सुदृढ़ रही है। आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद में काल विभाजन कर इसका मूल्यांकन समय-समय पर होता रहा है। आजादी के बाद के काल का मूल्यांकन किया जाए तो राजस्थान की पत्रिकाओं 'संबोधन' का बड़ा स्थान है। 'संबोधन' को मासिक 'लहर' की अगली कड़ी के रूप में देखा जाता रहा है। राजसमंद का कांकरोली कस्बा साहित्यिक धरातल पर संबोधन के कारण पहचाना जाता है। यहां से श्री कमर मेवाड़ी गत 43 वर्ष से त्रैमासिक 'संबोधन' का प्रकाशन कर रहे हैं। हिन्दी साहित् के लिए यह फ़ख्र की बात है।
कांकरोली का कमर मेवाड़ी के कारण और महत्‍व इसलिए बढ़ जाता है कि वे संबोधन के मार्फत प्रतिवर्ष आचार्य निरंजननाथ पुरस्‍कार समारोह आयोजित करते हैं।
इन दिनों मैंने संबोधन के 44 वर्ष का पहला अंक पढ़ा है। यह अक्‍टूबर-दिसम्‍बर, 2009 के अंक के रूप में है। मेवाड़ी जी ने इसे बड़े ही करीने से सजाया है। इस सजावट में इस अंक के अतिथि संपादक असद जैदी का योगदान भी मेवाड़ी जी को मिला है। आंतरिक और बाह्य दोनों रूपों से बेहतर अंक है। संबोधन के विशेषांकों की परम्‍परा से जुड़ा यह अंक 'समकालीन युवा कविता अंक' के रूप में है।
श्री असद जैदी 'हिन्‍दी कविता के पिछले बीस साल' के बहाने अपनी बात कहने का प्रयास करते नज़र आते हैं। बात संपूर्ण हुई या नहीं हुई यह बात अलग है, लेकिन बात में से बात यह जरूर काम की निकलती है कि युग विभाजन की तस्‍वीर के बीच जैदी जी भरमाते हैं- 'हम जिस युग में रह रहे हैं उसकी शुरूआत 1989-90 से हुई, इससे पहले की दुनिया कुछ और थी----।'
बाबरी मस्जिद घटनाक्रम के बाद एक नए युग की शुरूआत हुई थी, जिससे हिन्‍दी कविता आंदोलित हुई। इसी आंदोलित कविता के बीच से कई नाम हिन्‍दी साहित्‍य में उभरते हैं जो यथार्थ की जमीन पर टिके नजर आने के साथ-साथ यथार्थ प्रकट करने में दक्ष होते हैं। 'संबोधन' के इस अंक में ऐसे ही कई नाम शुमार हैं, जिन्‍हें पढ़कर अंक की सार्थकता महसूस होती है।
अंक में ढेरों युवा कवि हैं। अंशुल त्रिपाठी, अनीता वर्मा, अरूण शीतांशु, कृष्‍ण कल्पित, कुमार अनुपम, कुमार वीरेन्‍द्र, केशव तिवारी, गिरिराज किराड़ू, गीत चतुर्वेदी, ज्‍योत्‍सना शर्मा, तरूण भारतीय, नरेश चन्‍द्रकर, निर्मला गर्ग, नीलेश रघुवंशी, पंकज चतुर्वेदी, परमेन्‍द्रसिंह, पवन करण, प्रकाश, प्रभात, मंजरी दुबे, मनोज कुमार झा, मृत्‍युंजय, यतीन्‍द्र मिश्र, रवीन्‍द्र स्‍वप्निल प्रजापति, व्‍यामेश शुक्‍ल, शिरीष कुमार मौर्य, शिव प्रसाद जोशी, शैलेय, संजीव बख्‍़शी, सर्वेन्‍द्र विक्रम, सुन्‍दरचंद ठाकुर आदि इस विशेषांक में स्‍थान पाते हैं।
अंक की कविताएं बेहतर है, शिल्‍प के स्‍थान पर भावों को प्रधानता मिलना समकालीन कविता की विशेषता है।

पत्रिका : सम्‍बोधन
आवृत्ति : त्रैमासिक
संपादक : कमर मेवाड़ी
प्रकाशक : सम्‍बोधन
कांकरोली-313324
जिला- राजसमंद, राजस्‍थान
फोन 02952-223221, 9829161342
e-mail : qamar.mewari@rediffmail.com
मूल्‍य : 2100 रूपये आजीवन, 200 रूपये तीन वर्ष के लिए, 20 रूपये प्रति अंक
पृष्‍ठ :186

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