Saturday, February 20, 2010

एक अध्‍याय का अंत होना

(फोटो : विधायक श्री जयदेवप्रसाद इंदौरिया, दुलाराम सहारण(मैं), विधायक श्री चंदनमल बैद, 1997)

अभी-अभी समाचार मिला कि राजस्‍थान के वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता श्री चंदनमलजी बैद नहीं रहे।

यह ख़बर हालांकि सर्व स्‍वरूपा दु:खद नहीं है क्‍योंकि श्री बैद 88 वर्षीय थे और पिछले कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे। लेकिन मेरे जैसे अनेक लोगों के लिए यह दु:खद समाचार है क्‍योंकि हमने अपने क्षेत्र का एक पूर्व विधायक खोया है। जी, चंदनमलजी बैद मेरे क्षेत्र तारानगर के विधायक रहे और राज्‍य के वित्‍त मंत्रालय सहित अनेक मंत्रालयों को संभाला।

पिता श्रीजयचंद बैद के यहां सरदारशहर (चूरू) में जन्में श्री चंदनमलजी बैद राजस्थान विधानसभा में 8 बार पहुंचे। सन् 1952, 1957, 1962, 1972, 1980, 1990, 1993 एवं 1998 के चुनावों में वे विजयी होकर विधानसभा पहुंचे। श्री बैद ने 1980 में चूरू लोकसभा का कांग्रेस पार्टी से चुनाव भी लड़ा और कुल 120490 मत प्राप् किए।
सरदारशहर तारानगर विधानसभा क्षेत्र का संयुक् क्षेत्र सन् 1977 तक एक ही था तथा सरदारशहर विधानसभा के नाम से जाना जाता था। सन् 1977 में तारानगर विधानसभा क्षेत्र पृथक रूप से अस्तित् में आया।
1952 के प्रथम आम चुनाव से लेकर 1972 तक लगातार सरदारशहर विधानसभा का प्रतिनिधित्‍व श्री बैद ने किया। सन् 1977 में वे सरदारशहर विधानसभा से विजयी न हो सके, इसका मोटा कारण तारानगर क्षेत्र का अलग होना रहा। श्री बैद 1980 के चुनाव में सरदारशहर छोड़कर तारानगर आए और यहीं के होकर रहे। उन्‍होंने अपना अंतिम चुनाव 1998 का‍ विधानसभा चुनाव तारानगर से लड़ा और विजयी रहे। 1998 में राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री श्री अशोक गहलोत बने और श्री बैद राजस्‍थान के वित मंत्री।
2003 में हुए विधानसभा चुनाव में तारानगर विधानसभा का नेतृत्‍व श्री चंदनमल बैद के पुत्र और पेशे से चिकित्‍सक रहे डॉ. चंद्रशेखर बैद ने किया।

श्री चंदनमल बैद राजस्‍थान के उच्‍च शिक्षा मंत्री, नहर मंत्री भी रहे। तारानगर क्षेत्र के पीने के पानी और सिंचाई के पानी के लिए वे आजीवन संघर्षरत रहे और कुछ हद तक कामयाब भी रहे।

मुझे जहां तक याद है मेरे छोटे से गांव में पीने का मीठा पानी उपलब्‍ध था (मतलब मेरे बाल्‍यकाल में ही मेरे गांव में पीने पानी आ गया था और वह भी मीठा) जबकि इस क्षेत्र के बहुत से गांव आज भी पीने के पानी की समस्‍या से जूझ रहे हैं। यह श्रेय श्री चंदनमलजी को ही है।

स्‍वर्गीय श्री बैद की राजनीतिक खूबी जो क्षेत्र में सदैव याद की जाती रहेगी वह यह है कि उन्‍होंने कभी थाना-पुलिस की राजनीति नहीं की और न ही बदले की भावना से काम किया।

उनके विकास कार्यों की एक लम्‍बी फेहरिस्‍त है, जिसमें मेरे गांव का उच्‍च प्राथमिक विद्यालय ( जो अब माध्‍यमिक स्‍तर का हो चुका है) जिसमें मैंने ककहरा सीखा, सर्वोपरि है।

श्री बैद से मेरा संपर्क रहा है और छात्र राजनीति के दौरान सान्निध्‍य भी मिला है। इसे घनिष्‍ठता तो नहीं कह सकते लेकिन साहचर्य जरूर कह सकते हैं। उनकी खूबी के रूप में मुझे जो तथ्‍य दिखाई दिया वह यह कि उन्‍होंने कभी झूठा वादा नहीं किया। काम नहीं करवाना है तो उन्‍होंने साफ कह दिया कि यह नहीं होगा। अगर उन्‍होंने हां भरी है तो मतलब काम तय है। देखेंगे, करेंगे, हो जाएगा आदि जुमले उनके स्‍वभाव में नहीं थे, और आज की राजनीति में यही सब चल रहा है।
ऐसे राजनीतिक दौर में उनका जाना मेरी दृष्टि में एक अध्‍याय का अंत होना है।
विनम्र श्रद्धांजलि।

1 comment:

  1. मेरी ओर से भी विनम्र श्रद्धांजलि !!

    ReplyDelete