Wednesday, March 10, 2010

मन के सुकुन के लिए काम करता चित्रकार

इस पुस्‍तक के आवरण चित्र की तरह लगभग एक हजार पुस्‍तकों के आवरण राजस्‍थान के इस सपूत ने तैयार किए है। कूची की करामात लिए ज्‍यादा और तकनीक के सहयोग से कम। यही नहीं अब तक अनेक चित्र प्रदर्शनियों के माध्‍यम से सराहना पा चुकी यह प्रतिभा निरंतर उसी गति से गतिमान है। न कोई अभिमान और न दंभ।
यह प्रतिभा ‍ 'रामकिशन अडिग' के नाम से जानी-पहचानी जाती है।


राजस्‍थानी साहित्‍यकारों में लोकप्रिय चित्रकार अडिग चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के नरवासी गांव के निवासी हैं तथा वर्तमान में नवोदय विद्यालय, पल्‍लू (नोहर) हनुमानगढ़ में सरकार को सेवाएं दे रहे हैं।

श्री अडिग की चित्र प्रदर्शनी 'सीन-अनसीन' ने काफी दाद पाई थी। श्री अडिग द्वारा निर्मित 'पुस्‍तक पर्व-2009' शुभंकर भी काफी प्रशंसा पा चुका है। श्री अडिग की सद्य प्रदर्शित चित्र-प्रदर्शनी 'मोहतरमा' काफी चर्चित एवं उल्‍लेखनीय रही है। इस प्रदर्शनी में श्री अडिग के नारी के इर्द-गिर्द संयोजित कुल 21 चित्रों (5 पेंटिग और 16 पेंसिल वर्क) ने सभी का मन मोहा है।



यही नहीं श्री अडिग ने रंगों की आभा को एक अलग अंदाज में भी पेश किया है-



ऐसे चित्रकार का मानना है कि कला की साधना के क्रम में मन को सुकून मिलता है और बस यह हो जाता है। साहित्‍य, सिनेमा और कला की अनन्‍य विधाएं अडिग का मन मोहती हैं तभी तो डॉ. दुष्‍यंत ऐसे चित्रकार का परिचय कुछ यूं देते हैं- ''अडिग एक विचित्र जीव हैं। कभी वैश्विक सिनेमा के घोर दर्शक क़भी भारतीय शास्त्रीय और अल्पज्ञात विदेशी संगीत के गुणी रसिक। बिरले गंभीर साहित्य पाठक और सबसे पहले तथा आखिरकार एक सजग और विशिष्ट चित्रकार। इस विचित्र से जीव का कलाकर्म अपने समय के साथ आंख मिलाने के पागलपन में रचा हुआ है।''

खास : प्रयास संस्थान, चूरू‍ की ओर सूचना केंद्र, चूरू में (अप्रेल-2010) श्री रामकिशन अडिग की चित्र प्रदर्शनी प्रस्‍तावित है। श्री अडिग के खुद के ही जिले में यह प्रथम प्रदर्शनी होगी जिसकी खबर हम सभी को खुशी देने वाली है।

3 comments:

  1. वाह बेहद अनूठे खुबसूरत और मनभावन चित्र, 'रामकिशन अडिग' जी से परिचय करने का आभार.
    regards

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  2. इस खूबसूरत पोस्ट के लिए धन्यवाद और बधाई...
    निश्चय ही ‘अडिग’ की साधना प्रशंसनीय है...

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  3. भाई दूलाराम जी
    सांचाणी अडिग जी आंपणै अंचल रा विशिष्ठ चित्रकार है. कला रै प्रति आपरै समर्पण अर साधना रै पांण बे राष्ट्रीय स्तर माथै आपरी पिछाण बणाई है.
    बांरी खेचळ अर आपरी लेखणी नै लखदाद
    मदन गोपाल लढ़ा

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