Saturday, May 15, 2010

जाना भैंरोसिंह शेखावत का

भारत के उपराष्‍ट्रपति रहे श्री भैंरोसिंह शेखावत का निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। राजस्‍थान के खाचरिया बास (सीकर) में 23 अक्‍टूबर, 1923 को जन्‍में श्री शेखावत राजस्‍थान के तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे। वे लम्‍बे समय तक नेता प्रतिपक्ष राजस्‍थान विधानसभा भी रहे। मध्‍यप्रदेश से 1974 में वे राज्‍यसभा के लिए भी गए।
चूरू का सहनाली बड़ी गांव श्री शेखावत का ननिहाल है। उनकी प्राथमिक शिक्षा यहीं हुई। सहनाली से वे रतननगर पैदल ही पढ़ने जाते थे। उनके बचपन के दिन चूरू को समर्पित थे।
यही कारण रहा कि श्री शेखावत का मन सदैव चूरू के लिए प्रेम भरा रहा। अनेक योजनाओं को त्‍वरित स्‍वीकृति मिली। चूरू में कमला गोइन्‍का फाउण्‍डेशन द्वारा स्‍थापित 'मातुश्री कमला गोइन्‍का टाऊन हॉल' का शिलान्‍यास उन्‍हीं ने किया। यहां के नेतृत्‍व में कुछेक लोगों को उन्‍होंने आश्रय दिया। जिनमें चूरू के वर्तमान सांसद रामसिंह कस्‍वां एवं तारानगर विधायक राजेन्‍द्र राठौड़ का नाम अग्रगण्‍य है।
दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, किशनपोल, छबड़ा, निम्‍बाहेड़ा, धौलपुर, बाली से श्री शेखावत विधायक रहे। उन्‍होंने इन क्षेत्रों में एक नया नेतृत्‍व तैयार किया जो आज राजस्‍थान की राजनीति में मजबूती से खड़ा है।
अंतिम दिनों को छोड़ दें तो श्री शेखावत ने अपने राजनीतिक जीवन में कोई ऐसा बयान नहीं दिया जिस पर विवाद हो। वे धैर्य, संयम से जीने वाले और सोच-समझ कर बोलने वाले वाले इंसान थे। उनका किसी से दुश्‍मनी-भरा व्‍यवहार नहीं था। विरोध विचारों का था, व्‍यक्ति का नहीं। यही कारण रहा कि श्री शेखावत सर्वप्रिय रहे।
उनके विषय में अनर्गल बातें कभी किसी से नहीं सुनी गईं।
श्री भैंरोसिंह शेखावत के हृदय में मातृभाषा राजस्‍थानी के लिए अपार प्रेम था। अपने मुख्‍यमंत्रित्‍व काल में उन्होंने मान्‍यता संकल्‍प प्रस्‍ताव विधानसभा से भिजवाने के लिए पूरजोर प्रयत्‍न किए। यह अलग बात रही कि उन्‍हें पूरा समर्थन नहीं मिला, कारण कि बहुमत के वे प्राय:-प्राय: करीब ही रहे, एक-दो का विरोध उनके लिए बड़ा विरोध था।
वे अपने विधायकों को राजस्‍थानी के लिए तड़पते देखकर दुखी होते थे। जालौर के विधायक रहे जोगेश्‍वर गर्ग ने अनेक बार अपने संस्‍मरणों को सार्वजनिक रूप से रखा है। राजस्‍थानी साहित्यिक कार्यक्रमों में भी।

मुझे भी जयुपर के इंदिरा गांधी पंचायती राज भवन में एक अकादमिक समारोह में उनसे मिलने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ। वे उन दिनों राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री थे तथा मुख्‍य अतिथि की हैसियत से राजस्‍थानी भाषा, साहित्‍य एवं संस्‍कृति अकादमी, बीकानेर के वार्षिक समारोह में पधारे थे। संयोग से मुझे 'भत्‍तमाल जोशी महाविद्यालय साहित्‍य पुरस्‍कार' उन्‍हीं के हाथों से मिला। वे मेरे बी.ए. के दिन थे। अकादमी के अध्‍यक्ष श्री सौभाग्‍यसिंह शेखावत और उपाध्‍यक्ष श्री कल्‍याणसिंह शेखावत थे।
उक्‍त समारोह के अपने उद्बोधन में उन्‍होंने राजस्‍थानी भाषा के लिए जो बातें रखी वे सदैव याद की जाती रहेंगी। उनकी पीड़ा हरेक राजस्‍थानी की पीड़ा थी।
उपराष्‍ट्रपति बनने के बाद यह जरूर कहा जा सकता है कि उनकी लग्‍न राजस्‍थानी के प्रति अत्‍यधिक नहीं रही। परंतु अंत तक उनके हृदय के अंत:स्‍थल में राजस्‍थानी के लिए स्‍थान बना रहा।
श्री शेखावत का जाना न केवल राजस्‍थान बल्कि समूचे देश के लिए क्षति है। खासकर राजस्‍थानी भाषी समुदाय के लिए तो है ही।
भगवान उनकी आत्‍मा को शांति प्रदान करे।

2 comments:

  1. भैरों सिंह जी का जाना एक अपूर्णीय क्षति है |
    उन्हें विनम्र श्रधांजलि |

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  2. bhero singh ji rajasthan ri rajneeti raa loontha thambh haa. in me koi meenmekh koni. pan mayad bhasha rajasthani ne maanta devan ar deeravan me harmesh ola taaktaa reya. ve aapre jeevta jee o jas ni loont sakya. aa baat bhi saachi hai ke bhero singh ji mayad bhasha rajasthani raa ghana hetaalu haa ar in ne le ne vaare man me bhi ek peed hi pan rajneeti raa swaarth vaaraa haath baanndh raakhya haa. ve itta parbas ni haa pan rajnitik svaarth ne ve harmesh aage raakhyo. un ri seeva ne daaki koni. kei border cross karna ij pade. border cross karya bina target taai ni pugeeje. rajasthani raa loontha-loontha likhaaraa in aas ne man me ij legya. bheem ji pandia to o pran kar raakhyo ho ke jad taai bheru-bhaabhda raj khatam ni vhe jaave, yaa rajasthani bhasha ne maanta ni mil jaave. jiko bhi peli vhe, tad taai ve aapri choti re gaanth ni lagaavela. ar vaa aapre in pran ne nibhaayo. jiko jalmyo hai un ne ek din dunia chhod ne jaavno hai. o sansaar ro sesu bado saanch hai. in ne koi badal ni sake. pan jika log ki kar ne jaave vaare jas raa geetda gaaije. pan mhe samjhu ke bhero singh re bhaag me o jas likhyodo ij koni. ho. jai rajasthani.

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