Tuesday, June 15, 2010

डॉ. घासीराम वर्मा साहित्‍य पुरस्‍कार-2010 हेतु नाम भेजें

राजस्‍थान के हिंदी लेखन को समर्पित 'डॉ. घासीराम वर्मा साहित्‍य पुरस्‍कार-2010' हेतु 2005-2009 में छपी किसी एक कृति की 30 जून, 2010 तक अनुशंसा/संस्‍तुति करें-
prayas.sansthan@rediffmail.com पर।


वर्ष-2008 का पुरस्‍कार डॉ. सत्‍यनारायण (सितम्‍बर में रात) व 2009 का पुरस्‍कार मनीषा कुलश्रेष्‍ठ (कठपुतलियां) को दिया गया।

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प्रयास संस्थान
चूरू-331001 राजस्थान
www.prayas-sansthan.blogspot.com


डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार
पुरस्कार नियम
१. राजस्थान के हिन्दी लेखन को प्रोत्साहन-सम्मान देने के लिए वर्ष-2008 से यह वार्षिक पुरस्कार प्रारम्भ किया गया।
राजस्थान से तात्पर्य जन्म राजस्थान में होना या फिर विगत दस वर्षों से राजस्थान में निवासी होना होगा।
२. इस पुरस्कार का नाम 'डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार` रहेगा।
३. पुरस्कार किसे दिया जाये; इसका निर्धारण विगत वर्ष/वर्षों में प्रकाशित कृतियों के मूल्यांकन के बाद संस्थान कार्यकारिणी द्वारा किया जायेगा। किसी एक रचनाकार की कोई एक कृति का चयन पुरस्कार के लिए किया जाएगा।
४. चयनित लेखक को 5100 रुपये नगद, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न आदि पुरस्कार/सम्मान स्वरूप दिये जायेंगे। यात्रा-व्यय, भोजन व आवास की व्यवस्था भी संस्थान करेगा। सभी खर्चों का प्रबंधन संस्थान अपने संसाधनों से करेगा।
५. पुरस्कार वितरण समारोह राजस्थान के चूरू जिला मुख्यालय पर प्रतिवर्ष अगस्त/सितम्‍बर माह में आयोजित किया जायेगा। बशर्ते कोई अपरिहार्य कारण न हो।
६. संस्थान उचित समझे तो हिन्दी की राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रतिवर्ष विज्ञापन निकालकर पाठकों/साहित्यकारों से पुरस्कार हेतु कृति-कृतिकार के नाम की अनुशंसा मांग सकेगा।
७. विज्ञप्ति के माध्यम से पाठकों/साहित्यकारों से सिर्फ कृति-कृतिकार के नाम की अनुशंसा मांगी जायेगी। किसी कृति की प्रति नहीं मांगी जायेगी। अनुशंसित किसी कृति की अनुपलब्धता की स्थिति में जरूरत समझे तो वह कृति प्रकाशक से संस्थान स्वयं अपने खर्चे द्वारा मंगवायेगा।
८. ऐसी सूरत में आये नामों पर कार्यकारिणी विचार करेगी और योग्य रचना-रचनाकार का चयन करेगी। जरूरी हुआ तो संस्थान साहित्यकारों का तीन सदस्यीय निर्णायक मण्डल भी बना सकेगा।
९. संस्थान पुरस्कार वितरण समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हिन्दी के किसी एक लेखक-विद्वान व राज्य से किसी एक हिन्दी रचनाकार को आमंत्रित करेगा। ऐसे आमंत्रित रचनकारों के आवागमन व्यय तथा रहने-खाने का प्रबंध संस्थान अपने संसाधनों से करेगा।
१०. संस्थान जरूरी समझे तो किसी समानधर्मी दूसरे संस्थान को सहभागी बना सकेगा।
११. पुरस्कार हेतु नाम के चयन के विषय में संस्थान की अपनी स्वतंत्रता रहेगी। संस्थान कार्यकारिणी द्वारा नियमों में संशोधन-परिवर्द्धन किया जा सकेगा तथा कार्यकारिणी का हर निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा।



5 comments:

  1. jaankari ke liye bahut bahut dhnyvad

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  2. kya ham apni koi nayi rachna is pratiyogita k liye bhej sakte hain?

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  3. हम तो MP के है भाई ....

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  4. इस प्रकार के पुरस्कारों से रचनाकारों का मनोबल बढ़ता है ....जरुरत है पुरस्कार सही व्ताक्ति को दिया जाये ....!!

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  5. interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!

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