Monday, August 16, 2010

युवा काम बेहतर कर सकता है, बुरा लगे तो लगे

काफी समय से एक ऊर्जावान युवा के विषय में लिखने को मन कर रहा था परंतु, लगा कि नहीं, कहीं स्‍थानीयता हावी न हो जाये। स्‍थानीय-जुड़ाव के साथ कुछ और कारणों का जुड़ाव भी लोग कर लेते हैं। बस इसी कारण यह पोस्‍ट टलती रही। परंतु अब यह टलनी नहीं चाहिए, क्‍योंकि 37 साल के इस युवा ने स्‍वतंत्रता दिवस पर चूरू को शानदार तोहफा दिया है। राजस्‍‍थान की इस मरुभूमि को तकनीक से जोड़ने का साहस किया है।
इस युवा ने आम आदमी के हित का खयाल रखते हुए सरकारी तंत्र में चुस्‍ती और राजनीति के बहाने घुसे घुसपैठियों में सुस्‍ती ला दी है।

मैं बात कर रहा हूं, चूरू जिला कलक्‍टर डॉ. कृष्‍णाकांत पाठक का। श्री के. के. पाठक ने हाल ही 11 अगस्‍त को अपना 37वां जन्‍मदिन मनाया है। मूल रूप से मोहानिया, बिहार के निवासी, फिलॉसफी में डॉक्‍टर, साहित्‍यधर्मी श्री के. के. पाठक अपने 2001 बैच के टॉपरर्स में से एक रहे हैं। चूरू में आपका आना एक मायने में ऐसे समय में हुआ जब केन्‍द्र सरकार की महत्‍वपूर्ण योजना कानून का रूप लेने की करवट ले रही थी।
नरेगा और अब महानरेगा के माध्‍यम से ग्रामीण क्षेत्रों में एक क्रांतिकारी पहल हुई। परंतु यह भी सत्‍य है कि कोई महत्‍वाकांक्षी योजना अपने साथ कुछ दूसरे पहलू भी लेकर आती है। महानरेगा में राजनीति के घुसपैठियों के माध्‍यम से होने वाला भ्रष्‍टाचार इस योजना का मूल बन गया। ग्रामीण बिना काम पर जाए अपना नाम लिखाने लगे और आधा भुगतान लेकर संतुष्‍ट रहने लगे। वहीं मस्‍टरोल में नाम दर्ज अपने हिसाब से होने लगे। मूल रूप से यथार्थ धरातल पर योजना का खाका बदलता-सा नजर आने लगा।
ऐसे में चूरू कलक्‍टर ने ई-मस्‍टरोल की पहल की। चूरू जिला पहला जिला बना जिसमें ई-मस्‍टरोल जारी हुए। यह एक बहुत बड़ा काम था, जोकि श्री के के पाठक ने कर दिखाया। बाद में इस पहल का राज्‍य के दूसरे जिलों में अनुसरण हुआ। यही नहीं, श्री के के पाठक की कार्यक्षमता के बूते पर चूरू जिला राज्‍य का प्रथम जिला बनने की स्थिति में आया जहां 15 दिनों के बाद महानरेगा का भुगतान सीधे खातों में पहुंचना प्रारंभ हुआ।
इस पहल के पीछे एक युवा की सूक्ष्‍म दृष्टि, गहरी समझ एवं कार्यक्षमता ही है।

बात यहीं समाप्‍त नहीं होती। बात यहां से शुरू होती है। डीसीटीसी के माध्‍यम से कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के क्षेत्र में जिला कलक्‍टर ने गहरी रूचि दिखायी। उन्‍हीं के प्रयास एवं प्रेरणा रही कि डीसीटीसी, चूरू आज एक अपना मुकाम लिए हुए तीर्थसम है।
पिछले दिनों जब पूरा देश स्‍वतंत्रता दिवस की तैयारियों में लगा था तब युवा के.के.पाठक का दिमाग नये सपने बुनने में लगा था। उन्‍हें अपने इन सपनों को अंजाम देना था- स्‍वतंत्रता दिवस पर।
11 अगस्‍त, 2010 को जिला कलक्‍टर ने एक बैठक आहुत कर एक ऐसी घोषणा की, एक ऐसा खाका सबके सामने रखा, जो कि चौंकाने वाला था।
भारत सरकार तथा दिल्‍ली राज्‍य सरकार एवं अन्‍य कुछ दूसरे क्षेत्रों में संचालित एक बहुत ही उपयोगी आमजन हितार्थ स्‍कीम को चूरू में लागू करने वाला यह फैसला कम नहीं था। स्‍कीम थी- जन शिकायत निवारण प्रणाली यानी Public Grievance Redressal System.
Public Grievance Redressal System को 'लोकवाणी' नाम दिया गया। यह श्री के. के. पाठक का निजी चिंतन था कि यह चूरू जिले में लागू हो सकी। इस सिस्टम का जिला परिषद सभागार में 15 अगस्, 2010 को विधिवत उदघाटन किया गया।
इस सिस्‍टम के तहत कोई भी आमजन अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकता है। उसे शिकायत दर्ज कराने पर एक शिकायत नम्‍बर मिलता है। उस शिकायत नम्‍बर के आधार पर वह की हुई शिकायत का समय-समय पर पीछा कर सकता है। उसके द्वारा की गई शिकायत पर क्‍या कार्रवाई हुई, कौनसी स्‍टेज में शिकायत है आदि-आदि। अपनी शिकायत के प्रति वह रिमाइण्‍डर भी ऑनलाइन लगा सकता है।
अब तक यह प्रथा प्रचलन में थी कि एक कागज पर शिकायत की गई। वह जनता प्रकोष्‍ठ/सर्तकता प्रकोष्‍ठ की धरोहर बनते हुए न जाने कहां-कहां घुमता। शिकायतकर्ता अगर उसका पीछा भी करे तो कहां तक।

मेरा मानना है कि राजनीति के कुछ गंदे कीड़े (माफ करें) भले ही कुछ अनाप-शनाप बकें, सत्‍य तो यही है कि काम करने वाले भले ही कहीं रहे, वे अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ ही जाते हैं। यह उस क्षेत्र का सौभाग्‍य होता है, जहां वे रहते हैं।
चूरू जिला ऐसे कलक्‍टर, युवा ऊर्जावान कलक्‍टर को लिए हुए है, मैं तो इसे सौभाग्‍य ही कहूंगा।


11 comments:

  1. पाठक साहब और आप दोनों को शुभकामना!

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  2. aise hi oorjawan aur naveen drishti rakhne wale prashaskon ki avashyakta h aaj is desh ko.

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  3. शुभारंभ अच्छे हैं। बस ये चलते रह जाएँ।

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  4. Achha laga jankar ki is sad chuki vayvastha main abhi kuch kam karne vale log bache hue hain.

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  5. निसंदेह पाठक साहब के पास वह दृष्टि है जो इस जिले को देश के सर्वाधिक जागरुक और पारदर्शितापूर्ण प्रशासन वाले जिलों में शुमार कर सकती हैं। आम आदमी की समस्याओं के समाधान के लिए जो प्रतिबद्धता पाठक साहब में दिखती है, वैसे संस्कार इतने बड़े ओहदों पर बैठे लोगों में कम ही मिलते हैं। बेशक, वे चूरू के सौभाग्य हैं।

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  6. बहुत बधाई ! पाठक साहब को जिन्होने नया सोचने के साथ उसे कर दिखाया। ये बहुत बड़ी बात है।
    चुरु का यह सौभाग्य है।

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  7. ऐसे युवा व नेक विचारों से ही इंसानियत के जिन्दा होने का अहसास होता है ,श्री पाठक जी को हार्दिक नमन काश इससे और भी IAS कुछ सीखते ...

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  8. सबसे पहले मैं पाठक साहब और आपको बधाई देना चहुंगा
    ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुचइये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    मालीगांव
    साया
    आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
    लक्ष्य

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  9. अति सुन्‍दर....... सह‍ी समय पर सही अभिव्‍य‍क्ति

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