Sunday, May 23, 2010

राजस्‍थान के चिट्ठाकार एक मंच पर आएं

राजस्‍थान से नित्‍य-प्रति अनेक चिट्ठे (ब्‍लॉग) लिखे जा रहे हैं। हम जैसे अनेक हैं जो उनको पढ़ना चाहते हैं। खासकर चुनिंदा ताजा प्रविष्ठियों को।
परंतु दिक्‍कत ये आती है कि एक जगह सभी की सूचना उपलब्‍ध नहीं है। कुछ प्रयास भी इस दिशा में हुए हैं और कुछ चल भी रहे हैं।
हमने 'राजस्‍थान ब्‍लॉगर्स' मंच के माध्‍यम से एक प्रयास आरम्‍भ किया है। ब्‍लॉग एग्रीगेटर के रूप में। इसमें आपकी ताजा लिखी पोस्‍ट दिखेगी, बशर्ते आपका चिट्ठा इससे जुड़ा है।

अगर आप अब तक नहीं जुडे़ तो

Sunday, May 16, 2010

मीडिया का दायरा बढा नहीं घटा है



राजस्‍थानी के प्रसिद्ध कवि बुद्धिप्रकाश पारीक नहीं रहे। राजस्‍थानी में ढूंढ़ाड़ी बोली के प्रबल हस्‍ताक्षर थे पारीकजी। उनका जाना एक बड़ी क्षति है। मन विचलित है, सबसे बड़ा विचलन उनके चुपचाप चले जाने के कारण है।
मेरा यहां अर्थ अखबारों की स्‍थानीयता से है। यह एक सवालिया निशान है मीडिया पर।

Saturday, May 15, 2010

जाना भैंरोसिंह शेखावत का

भारत के उपराष्‍ट्रपति रहे श्री भैंरोसिंह शेखावत का निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। राजस्‍थान के खाचरिया बास (सीकर) में 23 अक्‍टूबर, 1923 को जन्‍में श्री शेखावत राजस्‍थान के तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे। वे लम्‍बे समय तक नेता प्रतिपक्ष राजस्‍थान विधानसभा भी रहे। मध्‍यप्रदेश से 1974 में वे राज्‍यसभा के लिए भी गए।
चूरू का सहनाली बड़ी गांव श्री शेखावत का ननिहाल है। उनकी प्राथमिक शिक्षा यहीं हुई। सहनाली से वे रतननगर पैदल ही पढ़ने जाते थे। उनके बचपन के दिन चूरू को समर्पित थे।
यही कारण रहा कि श्री शेखावत का मन सदैव चूरू के लिए प्रेम भरा रहा। अनेक योजनाओं को त्‍वरित स्‍वीकृति मिली। चूरू में कमला गोइन्‍का फाउण्‍डेशन द्वारा स्‍थापित 'मातुश्री कमला गोइन्‍का टाऊन हॉल' का शिलान्‍यास उन्‍हीं ने किया। यहां के नेतृत्‍व में कुछेक लोगों को उन्‍होंने आश्रय दिया। जिनमें चूरू के वर्तमान