Saturday, October 16, 2010

एक गांव जो प्रतिभाएं गढ़ता है





समूचा राजस्‍थान प्रांत आजकल कृष्‍णा पूनिया के राष्‍ट्रमंडल पदक के स्‍वागत में उमड़ रहा है। कृष्‍णा पूनिया ने डिसकस थ्रो में महिला वर्ग में गोल्‍ड जीता है। कृष्‍णा पूनिया हरियाणा (अग्रोहा) के किसान दंपती श्रीमती शांतिदेवी- श्री महासिंह सूरा की बेटी है और राजस्‍थान के चूरू जिले के गांव गागड़वास  (राजगढ़) की बहू है। गागड़वास के श्री वीरेन्‍द्र पूनिया स्‍वयं अच्‍छे खिलाड़ी रहे हैं और अपनी पत्‍नी कृष्‍णा के कोच रहते हुए उन्‍होंने बड़ी मेहनत से (कृण्‍णा को) तराशा भी है। 
कृष्‍णा ने स्‍वागत के बाद  कहा कि हर घ्‍ार में मेरी जैसी कृष्‍णा हैं, लेकिन उन्‍हें उचित अवसर व मददगार मिलना चाहिए। 
सही है, प्रतिभाएं हर ओर होती हैं। उन्‍हें सही मंच और सही दिशा देने वाला चाहिए। कुछ प्रतिभाएं ऐसी भी होती हैं जो दिशा का निर्धारण कभी-कभी स्‍वयं कर लेती हैं परंतु उनके पीछे गहरा संघर्ष छिपा होता है। 
ऐसे ही एक संघर्ष का नाम है सुरेन्‍द्र सिंह। 
कृष्‍णा पूनिया और वीरेन्‍द्र पूनिया के गांव गागड़वास का निवासी सुरेन्‍द्रसिंह। 
अपनी कूची के बल पर करामात दिखाता किसान पुत्र सुरेन्‍द्रसिंह, जिसकी पीढि़यों में भी कूची से वास्‍ता नहीं रहा। किसानी के बल पर यापन करनेवाले परिवार का एक सदस्‍य, जो राजधानी जयपुर की कलादीर्घाओं में ऊपर उकेरे गए चित्रों जैसे अनेक चित्रों के बूते पर अपना मुकाम बनाने के लिए संघर्षरत है।
पिछले दिनों अंतरजाल के मायाजाल के बीच से सुरेन्‍द्रसिंह मेरे सामने निकला और अपनी कला के बल पर मुझे मोह गया। 
लिखने-समझने को बहुत मन चाह रहा है, लेकिन जब बात कृष्‍णा पूनिया और गांव गागड़वास की होने लगी तो आज यकायक सुरेन्‍द्रसिंह का स्‍मरण हो आया और त्‍वरित गति से टूटे दो शब्‍द आपके सामने रख दिए। 
शायद सुरेन्‍द्रसिंह आपको ही पसंद आ जाए।
आप सुरेन्‍द्रसिंह के विषय में कुछ और यहां से जान सकते हैं-