Sunday, November 20, 2011

20 11 20 11

आज 20 11 20 11 है। यानी 20.11.2011, यह पल न जाने क्‍यों महत्‍त्‍वपूर्ण लग रहा है। तवारीख के हिसाब से कुछ खास नहीं फिर भी खास। 

निज मायने में 20 नवम्‍बर को एक माह पूर्ण हो लिया, पूर्ण इस मायने में कि आज से ठीक एक महीने पहले यानी 20 अक्‍टूबर को प्रयास संस्‍थान, चूरू के साहित्यिक-सांस्‍कृतिक-सामाजिक सरोकारों के लिए चूरू शहर में 800 दरगज भूमि का टुकड़ा खरीदा था। 
टुकड़ा दूसरों की नजर में, हमारी नजर में एक पूरा संसार, जिसको हमने आबाद करने के लिए अपनी जद में किया। वर्षों से जागते-सोते लिए गए सपने पूरे करने की कार्यस्‍थली। इस मुददे पर लम्‍बी चर्चा फिर कभी..... । 

पर आज यानी 20 11 20 11 को अंचल में कुछ खास घटा।

चूरू जिले के राजगढ़ तहसील मुख्‍यालय पर सात दशक पुरानी एक साहित्यिक संस्‍था है- साहित्‍य समिति, राजगढ़ (चूरू)। उसी साहित्‍य समिति के वर्तमान मुखिया साहित्‍यकार-साहित्‍यसेवी डॉ. रामकुमार घोटड़ ने  इतिहास रचने की ओर आज कदम बढ़ाया है। 
साहित्‍य समिति ने राजगढ़ ही नहीं अपितु अंचल की थाती को संजोने वाले श्रेष्‍ठी सूरजमल मोहता की 101 वीं जयंती पर एक साहित्यिक पहल की है। 'सेठ सुरजमल मोहता साहित्‍य पुरस्‍कार' का शुभारंभ करके।
और हम सब उस समारोह के गवाह बने, सूत्र यहीं से भी पकड़े जा सकते हैं 20 11 20 11 के।

समारोह की सूचना भर यह कि दर्शनशास्‍त्र के आधिकारिक विद्वान और साहित्‍य सेवी डॉ. कृष्‍णाकांत पाठक को वर्ष 2011 का 'सेठ सूरजमल मोहता साहित्‍य पुरस्‍कार' प्रदान किया गया। मुख्‍य अतिथि थे- डॉ. चंद्रप्रकाश देवल, साहित्‍यकार, अजमेर और अध्‍यक्षता की डॉ. महेन्‍द्र खड़गावत, अध्‍यक्ष, राजस्‍थानी भाषा साहित्‍य एवं संस्‍कृति अकादमी, बीकानेर ने। कार्यक्रम में साहित्‍यकार बैजनाथ पंवार, नागराज शर्मा और पृथ्‍वीराज रतनू , सचिव, राजस्‍थानी भाषा, साहित्‍य एवं संस्‍कृति अकादमी, बीकानेर बतौर अतिथि उपस्थिति थे। 

यह शुरूआत बहुत खास है। वह इस मायने में कि अंचल के इस क्षेत्र को सबसे अधिक साहित्यिक संस्‍कारों की जरूरत है। पुलिस थाने के रिकॉर्ड इस बात की गवाही देते हैं कि यह अंचल किस ओर जा रहा है। 

साहित्‍य व्‍यक्ति को संस्‍कारवान बनाता है। और इसी सत्‍य को पकड़ने पर खुशी का इजहार किया जा सकता है ऐसी शुरूआत पर। 

स्‍वागत...... 
फिलहाल इतना ही।